कविता

सूर्य-तिलक

मंदिर में बालरूप श्रीराम के मस्तक तक आती सूर्य की किरण।
सूर्य-तिलक से प्रेरित एआई चित्रांकन।
पाठ का आकार

चलो अयोध्या आज चले हम,
है सूर्य- तिलक श्रीराम का।
विष्णु के अवतारी रघुवर,
कौशल्या -सुत प्राण का ।।

रामनवमी पावन पुनीत पर्व ,
है जन्म दिवस श्रीराम का ।
गूंज रहा चहूंओर राम धुन,
जय जय जय श्रीराम का ।।

होगा अद्भुत पावन वह क्षण,
भानु-मयुख गर्भ-गृह आयेगी।
राम लला के मस्तक पर वह,
जब सूर्य तिलक लगायेगी।।

चार मिनट तक दिव्य किरणें, ,
रघुनंदन मुखङा निहारेगी।
घङियाँ भी कर-जोङ के तत्क्षण,
राम मंत्र दुहरायेगी ।।
चलो अयोध्या आज चले हम…।

डॉ. नीलिमा वर्मा “निशिता”

कवयित्री, लेखिका एवं संस्कृत विदुषी