डॉ. नीलिमा वर्मा “निशिता”

लेखिका का परिचय

संस्कृत अध्ययन, शिक्षण और साहित्य-सृजन से जुड़ी एक जीवन-यात्रा।

मधुबनी मछली और कमल की सजावट तथा अरिपन वाले अध्ययन कक्ष में पुस्तकें और कलम।
लेखिका का परिचय से प्रेरित एआई चित्रांकन।

जीवन और साहित्य-यात्रा

डॉ. नीलिमा वर्मा “निशिता” कवयित्री, लेखिका और संस्कृत विदुषी हैं। उनका जन्मस्थान बिहार के सीतामढ़ी जिले का बेलाही नीलकंठ है। उनका शिक्षण और साहित्यिक कार्य मुज़फ़्फ़रपुर से जुड़ा रहा है।

उनके लेखन में हिन्दी कविता, बाल-कविता, लघुकथा, साहित्यिक समीक्षा, भाषा-विमर्श और संस्कृत अध्ययन जैसे विषय मिलते हैं। जीवन की संवेदनाएँ, शिक्षा, संस्कृति और मानवीय संबंध उनके सृजन के विविध संदर्भ हैं।

शिक्षा एवं अध्यापन

  • संस्कृत में एम.ए. एवं पी-एच.डी. — बिहार विश्वविद्यालय, मुज़फ़्फ़रपुर।
  • बी.एड. — लखनऊ विश्वविद्यालय।
  • एस.एन.एस. कॉलेज, मुज़फ़्फ़रपुर में अध्यापन; पूर्व संस्कृत विभागाध्यक्षा।
  • यू.जी.सी., नई दिल्ली की विजिटिंग एसोसिएटशिप — 1995।
  • “वेद एण्ड कम्प्यूटर” कार्यशाला, आई.आई.आई.टी., हैदराबाद — 2000।
  • राष्ट्रीय कम्प्यूटर साक्षरता मिशन से डिप्लोमा — 2003।

संस्कृत के प्रति समर्पण

उनके जीवन-वृत्त में वर्ष 2000 से निःशुल्क संस्कृत शिक्षण केंद्र के संचालन का उल्लेख है। वैदिक शिक्षा, संस्कृत काव्य और भाषा-अध्ययन पर उनके आलेख इस रुचि का विस्तार हैं।

शोध एवं समीक्षात्मक लेखन

वर्षशोध / आलेख
1992कालिदास की उपमा-योजना — अभिज्ञानशाकुंतलम् के आलोक में; विश्व संस्कृत सम्मेलन, उज्जैन।
1993कवि भोज का गुण-विवेचन — मध्य प्रदेश संस्कृत अकादमी का भोज-समारोह।
1998उपमा-योजना का सामाजिक संदर्भ — शिवराजविजय आख्यायिका के आलोक में; अखिल भारतीय संस्कृत सम्मेलन, बड़ौदा।
2000वैदिक मंत्रों का शिक्षण-सत्र — अरुण-बिहार।
2004वेदों में पर्यावरण सुरक्षा — अखिल भारतीय संस्कृत सम्मेलन, भोपाल।
2013वेदों में चित्रांश-प्रमाण; हमारा नायक चित्रगुप्त — चित्रगुप्त एसोसिएशन, मुज़फ़्फ़रपुर की स्मारिका।
2018बिहार गौरवं — अक्षर वाणी।
2020अपारे काव्य संसारे कविरेकः प्रजापति — आदित्य संस्कृति पत्रिका।

सम्मान

  • 2014 — वासुदेव अग्रवाल साहित्य शिखर सम्मान, संरचना आर्ट थियेटर, मुज़फ़्फ़रपुर।
  • 2019 — शिल्पी चड्ढा स्मृति सम्मान, नई दिल्ली।
  • 2021 — राष्ट्रकवि रामधारी सिंह दिनकर शिखर बाल साहित्य सम्मान, बिहार हिन्दी बाल साहित्य शोध संस्थान, दरभंगा।
  • 2021 — पूर्वाशा हिन्दी अकादमी द्वारा “निशिता” उपनाम अलंकरण सम्मान।
  • 2022 — साहित्य-चूड़ामणि सम्मान, बिहार हिन्दी साहित्य सम्मेलन।
  • 2022 — डॉ. महाराज कृष्ण जैन स्मृति सम्मान, पूर्वोत्तर हिन्दी अकादमी, मेघालय।
  • 2022 — ग्रामीण गौरव सम्मान, श्री दुःखहरण पुस्तकालय, बेलाही नीलकंठ, सीतामढ़ी।

साहित्यिक सहभागिता

उनके साहित्यिक कार्यों में पूर्वोत्तर हिन्दी अकादमी, मेघालय की मानद क्षेत्रीय संयोजक की भूमिका, पूर्वाशा हिन्दी अकादमी के कार्यक्रमों में समीक्षा, पूर्वाशा पत्रिका, जोरहाट में सह-संपादन तथा जिला हिन्दी साहित्य सम्मेलन, मुज़फ़्फ़रपुर में साहित्य मंत्री की भूमिका शामिल रही हैं।