कविता

शत-शत नमन

पुस्तक और दीपक के पास शुष्क भूमि में बगीचे को सींचती नदी।
शत-शत नमन से प्रेरित एआई चित्रांकन।
पाठ का आकार

माता सरस्वती के वरदान कृष्ण जैन थे ,,
शुभ छन्द सम्पदा के सम्मान कृष्ण जैन थे ।

पावन गंगा की ऊर्मि थी धन्य जिनको पाकर,
जलते मरुस्थलों में उद्यान कृष्ण जैन थे।

कैसे करूँ मैं उपमा नन्ही-सी लेखनी से;
हर शब्द ब्रह्म जिनका, रसखान कृष्ण जैन थे ।

कहानी लेखन विद्यालय का वैभव विराट जिनसे,
कविता विधा के अनुपम विद्वान कृष्ण जैन थे ।

हर गीत था जड़ाऊ कविता सरस टिकाऊ
नवगीत की विधा के प्रतिमान कृष्ण जैन थे ।

नवजात साधकों को जिनने सृजन से जोड़ा
ऐसे थे पथ प्रदर्शक, गुरुज्ञान कृष्ण जैन थे ।

हे सरस्वती -पुत्र! पुण्यात्मा तेरे चरणों में शत-शत नमन ।।

डॉ. नीलिमा वर्मा “निशिता”

कवयित्री, लेखिका एवं संस्कृत विदुषी