जयकारा एकबार लगाओ,
जय बोलो सियाराम की ।
घने कोहरे छट जायेगा,
है पुण्य धरा श्री राम की ।
माटी का तेरा मेरा काया,
माटी का व्यापार है।
खिंच रहा छकङा शिव वाहन,
फिर डरना बेकार है ।
कालचक्र सुख-दुख का पहिया,
दौङ रहा अविराम है ।
दूर गगन से निरख रहा ,
सुर्यवंशी दिनमान है ।
है मंजिल कहाँ कहाँ रूकना है ।
पूर्व सुनिश्चित भाल है।
डर डर कर जीना फिर कैसा,
निर्वल के बल राम है ।
