माता सरस्वती के वरदान कृष्ण जैन थे ,,
शुभ छन्द सम्पदा के सम्मान कृष्ण जैन थे ।
पावन गंगा की ऊर्मि थी धन्य जिनको पाकर,
जलते मरुस्थलों में उद्यान कृष्ण जैन थे।
कैसे करूँ मैं उपमा नन्ही-सी लेखनी से;
हर शब्द ब्रह्म जिनका, रसखान कृष्ण जैन थे ।
कहानी लेखन विद्यालय का वैभव विराट जिनसे,
कविता विधा के अनुपम विद्वान कृष्ण जैन थे ।
हर गीत था जड़ाऊ कविता सरस टिकाऊ
नवगीत की विधा के प्रतिमान कृष्ण जैन थे ।
नवजात साधकों को जिनने सृजन से जोड़ा
ऐसे थे पथ प्रदर्शक, गुरुज्ञान कृष्ण जैन थे ।
हे सरस्वती -पुत्र! पुण्यात्मा तेरे चरणों में शत-शत नमन ।।
