कविता

चंदा मामा दूर के

तारों और मुस्कुराते चाँद के साथ चंद्रयान के लैंडर और रोवर की कल्पनात्मक चंद्र-यात्रा।
चंदा मामा दूर के से प्रेरित एआई चित्रांकन।
पाठ का आकार

मामा मामा प्यारा मामा,
चंदा मामा दूर के।
मम्मी हरदम कहती रहती,
तुम पुआ पकाते गुङ के ।।
मामा मामा…..।
मुन्ना विक्रम हुआ सयाना,
मामा घर जाने को ठाना ।
चंद्रयान में बैठ के मुन्ना,
निकल पङा है टूर पर ।।
मामा मामा …..।

मैं मामा घर जाऊंगा ,
दूध मलाई खाऊंगा ।
परकोठे पर चढकर उनके,
अपना ध्वज फहराऊंगा ।
मामा मामा…..।

जब मामा के घर तुम जाना,
संभल संभल के कदम बढाना।
जगह जगह जल गड्ढे होंगे,
देखो मुन्ना फिसल ना जाना।।
मामा मामा ……।
प्रज्ञान रोवर साथ चलेगा,
अतुलित अद्भुत काम करेगा।
अशोक स्तंभ-इसरो प्रतीक का,
कदम-कदम पर छाप छोङेगा ।।
मामा मामा……..।
दक्षिणी ध्रुव है बङा अजूबा,
छाया रहता गहन अंधेरा ।
शिव शक्ति से उच्चरित,
होता रहता अनहद बाजा ।।। मामा मामा …….।
जब भी कोई आयेगा ,
लक्षिणी ध्रुव पर जायेगा ।
जय भारत जय भारती माता,
कहकर शीश नवायेगा ।
मामा मामा ……।

डॉ. नीलिमा वर्मा “निशिता”

कवयित्री, लेखिका एवं संस्कृत विदुषी