आलेख

हिन्दी हैं हम

मिथिला शैली की दीवार और अरिपन वाले आँगन में साथ पढ़ते लोग।
हिन्दी हैं हम से प्रेरित एआई चित्रांकन।
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हिन्दी विश्व की एक प्रमुख भाषा है । यह हिन्दुस्तानी भाषा की एक मानकीकरण रूप है । जिसमें संस्कृत के तत्सम और तदभव शब्दों का प्रयोग अधिकाधिक रूप में किया जाता है । विश्व की आर्थिक मंच के गणना अनुसार यह विश्व की दश शक्तिशाली भाषाओं में एक है । जहाँ तक इसके शब्द भण्डारण की बात है तो अभी तक एक सौ दो अरब, अट्ठत्तर करोड़, पच्चास लाख शब्दों का प्रयोग हुआ है और यदि इसी क्रम से नये शब्दों का प्रयोग होता रहे तो मान्यता है कि सौ से दो सौ बर्षों तक इसका शब्द भण्डार खाली नहीं होगा।

मानक भाषा हिन्दी — मानक भाषा किसी देश अथवा राज्य की वह परिनिधि तथा आदर्श भाषा होती है जिसका प्रयोग वहाँ के शिक्षित वर्ग द्वारा अपने सामाजिक, सांस्कृतिक,साहित्यिक, व्यापारिक , वैज्ञानिक तथा प्रशासनिक कार्यों में किया जाता है । हम जानते है कि कोई भी भाषा का मानकीकरण होने के लिए उसे तीन अवस्थाओं से गुजरना होता है । बोली– इसका प्रारम्भिक सोपान है । जिसमें कोई भाषा वहाँ के सीमित जन समुदाय में बोली जाती है । इसका क्षेत्र सीमित होता है । तभी कहा जाता है कि — कोस कोस पर पानी बदले , चार कोस पर वानी।

भाषा– जब कोई बोली किसी विशेष भौगोलिक,सामाजिक, राजनीतिक,प्रशासनिक कारणों के फलस्वरूप व्याकरणिक ढांचे में ढलने लगती है तब वहीं बोली भाषा बन जाती है ।

मानक भाषा— मानक भाषा के अंतर्गत कोई अन्य भाषा का स्वतंत्र अस्तित्व नहीं रहता,उसकी आपनी शैक्षणिक, वाणिज्यिक, तकनीकि और कानूनी शब्दावली होती है,उसकी अपनी लिपि , अपना आदर्श रूप,अपना व्याकरण,और अपनी भाषा शास्त्र होता है । मानक भाषा का क्षेत्र अत्यधिक विस्तृत होता है वर्तनी, उसके उच्चारण, शब्द सम्पदा,उसके धरातल पर स्पष्टरूपेण समादृत रहता है ।

राजभाषा हिन्दी संबिधान सभा की लम्बी बहस के उपरांत 14 सितम्बर 1949 को राजभाषा के रूप में हिन्दी को स्वीकृति मिली । संविधान के अनुच्छेद 343 से 351 तक राजभाषा से संबंधित विभिन्न तत्वों को विधिवत रूप से वर्णित किया गया । इतना ही नहीं इस धारा में यह स्पष्टरूपेण कहा गया कि भारतीय संघ की राजभाषा हिन्दी होगी एवं इसकी लिपि देवनागरी होगी , संघ के राजकीय प्रयोजनों में प्रयुक्त अंक का स्वरूप अंतरराष्ट्रीय होगा , यथा-123 45……।राजभाषा अधिनियम 123 के अनुच्छेद 120 के अनुसार संसद का कार्य हिन्दी अथवा अंग्रेज़ी में किया जा सकता है , राज्यसभा के सभापति या लोकसभा के अध्यक्ष किसी विशेष परिस्थिति में ही सदन के किसी सदस्य को अपनी मातृभाषा में संसद को संबोधित करने को अनुमति दे सकता है ।

14 सितंबर 1949 से अद्यतन प्रत्येक बर्ष हम अति हर्ष के साथ हिन्दी दिवस मनाते है । आज के इस कम्प्यूटर युग में यूनिकोड का प्रचलन होने के बाद भी हिन्दी की देवनागरी लिपि लगभग सभी आपरेटिंग सिस्टमों और सभी अभीकलनी युक्तियों में यूनिकोड फान्ट यथा -कृतिदेव, आकृति,मंगल,गार्गी आदि के रूप में काम कर रही है । इति

जय राजभाषा, जय हिन्दी ।

डॉ. नीलिमा वर्मा “निशिता”

कवयित्री, लेखिका एवं संस्कृत विदुषी